Friday, August 21, 2026
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Durga Chalisa Full Lyrics – Ritesh Mishra

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दुर्गा चालीसा एक धार्मिक स्तुति है जो हिन्दू धर्म में देवी दुर्गा की महिमा का गुणगान करती है। यह चालीसा 40 छंदों (इसलिए “चालीसा”) में लिखी गई होती है और इसे विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा अष्टमी, और अन्य देवी पर्वों के दौरान भक्तों द्वारा पढ़ा जाता है।

दुर्गा चालीसा का उद्देश्य:

• “चालीसा” का मतलब होता है चालीस छंदों वाला भजन।
• यह हिंदी भाषा में लिखा गया एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है।
• इसमें माँ दुर्गा के नौ रूपों, उनकी शक्ति, दया, और रक्षक रूप का वर्णन किया गया है।
• इसे पढ़ने से भक्ति, साहस, और नकारात्मकता से रक्षा का अनुभव होता है।
• इसे गोस्वामी तुलसीदास जी के समकालीन कवियों में से किसी ने रचा है (कुछ मतों में तुलसीदास द्वारा ही रचित माना जाता है)

दुर्गा चालीसा का उपयोग

• भक्तों द्वारा देवी दुर्गा को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए पढ़ी जाती है।
• इसे नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से पढ़ा जाता है, लेकिन इसे किसी भी दिन पढ़ा जा सकता है।
• ऐसा माना जाता है कि इसका पाठ करने से भय, दुख, रोग और शत्रुओं से रक्षा होती है।
• यह आत्मबल, साहस और मन की शांति प्रदान करती है।

Durga Chalisa Full Lyrics

  • English
  • Hindi

नमो नमो दुर्गे सुख करनी
नमो नमो अम्बे दुःख हरणी
निरंकार है ज्योति तुम्हारी
तिहुँ लोक फैली उजियारी

शशि ललाट मुख मह विशाला
नेत्र लाल भ्रकुटि विकराला
रूप मातु को अधिक सुहावे
दरश करत जन अति सुख पावे

तुम संसार शक्ति लेय कीना
पालन ​​हेतु अन्न धन दीना
अन्नपूर्णा हुई जग की पाला
तुम्हीं आदि सुन्दरी बाला

प्रलयकाल सब नाशन हारि
तुम गौरी शिव शंकर प्यारी
शिव योगी तुम्हारे गुण गावें
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावे

रूप सरस्वती को तुम धरा
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिना उबरा
धर्यो रूप नरसिम्हा को अम्बा
प्रगट भई फाड़ कर खंबा

रक्षा कारी प्रह्लाद बचायो
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं
श्री नारायण अंग समाहिं

क्षीर सिन्धु में करत विलासा
दया सिन्धु दीजे मन आसा
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी
महिमा अमित न जात बखानी

मातंगी अरु धूमावती माता
भुवनेश्‍वरी बगला सुखदाता
श्रीभैरव तारा जग तारिणी
छिन्न भला भव दुःख निवारिणी

केहरि वहां सोहे भवानी
लंगूर वीर चलत अगवानी
कर में खप्पर खडगा विराजे
जाको देख काल डर भजे

सोहे अस्त्र और त्रिशूला
जते उत्था शत्रु हिय शूला
नगरकोट में तुम्ही विराजत
तिहौं लोक में डंका बजात

शुम्भ निशुम्भ दानव मारे
रक्त बीज शंखना संहारे
महिषासुर नृप अति अभिमानी
जेहि अघ भर महीं अकुलानी

रूप कराल काली का धारा
सेना सहित तुम तिहिं समाहारा
परी गंध संतान पर जब प्रहार
भयि सहाय मातु तुम तब तब

अमरपुरी अरु बासव लोका
तब महिमा सब रहे अशोका
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी
तुम्हें सदा पूजे नर नारी

प्रेम भक्ति से जो यश गावे
दुःख दरिद्र निकट नहिं आवे
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लायी
जन्म मरण तको छूटि जाई

जोगी सुर मुनि कहत पुकारि
योग न हो बिना शक्ति तुम्हारी
शंकर अचरज तप किन्हो
कामरू क्रोध जीत सब लीन्हो

निशदिन ध्यान धरो शंकर को
काहु काल नहीं सुमिरो तुमको
शक्ति रूप का मरम न पायो
शक्ति गई तब मन पछतायो

शरणगत हुई कीर्ति बखानि
जय जय जय जगदम्ब भवानी
भयि प्रसन्न अनादि जगदम्बा
दैयी शक्ति नहिं कीन विलम्बा

मौकोन मातु कष्ट अति घेरो
तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो
आशा तृष्णा निपट सतावे
रिपु मूरख मोहि दर्पवे

शत्रु नाश कीजै महारानी
सौमिरों इकचित तुम्हीं भवानी
करो कृपा हे मातु दयाला
रिद्धि सिद्धि दे करहौ निहाला

जब लगि जियौं दया फल पौं
तुम्हारो यश मैं सदा सुनाऊं
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै
सब सुख भोग परमपद पावे

देविदास शरण नीज जानि
करहुं कृपा जगदम्बे भवानी
करहुं कृपा जगदम्बे भवानी
शरणागत रक्षा करे

भक्त रहे निशंक
मैं आया तेरी शरण में
मातु लीजिये अंक

नमो नमो दुर्गे सुख करनी
नमो नमो अंबे दुःख हरनी
निरंकार है ज्योति तुम्हारी
तिहूँ लोक फैली उजियारी

शशि ललाट मुख महाविशाला
नेत्र लाल भृकुटि विकराला
रूप मातु का अधिक सुहावे
दरश करत जन अति सुख पावे

तुम संसार शक्ति लै कीना
पालन हेतु अन्न धन दीना
अन्नपूर्णा हुई जग पाला
तुम ही आदि सुन्दरी बाला

प्रलयकाल सब नाशन हारी
तुम गौरी शिव शंकर प्यारी
शिव जोगी तुम्हरे गुण गावें
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें

रूप सरस्वती को तुम धारा
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा
धरा रूप नरसिंह को अम्बा
प्रगट भई फाड़कर खम्बा

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं
श्री नारायण अंग समाहीं

क्षीरसिन्धु में करत विलासा
दयासिन्धु दीजै मन आसा
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी
महिमा अमित न जात बखानी

मातंगी धूमावति माता
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता
श्री भैरव तारा जग तारिणी
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी

केहरि वाहन सोह भवानी
लांगुर वीर चलत अगवानी
कर में खप्पर खड्ग विराजै
जाको देख काल डर भाजै

सोहै अस्त्र और त्रिशूला
जाते उठत शत्रु हिय शूला
नगरकोट में तुम्हीं विराजत
तिहुँलोक में डंका बाजत

शुम्भ निशुम्भ दनुज तुम मारे
रक्तबीज शंखन संहारे
महिषासुर नृप अति अभिमानी
जेहि अघ भार मही अकुलानी

रूप कराल कालिका धारा
सेना सहित तुम तिहि संहारा
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब
भई सहाय मातु तुम तब तब

अमरपुरी अरू बासव सब लोका
तब महिमा सब रहें अशोका
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी
तुम्हें सदा पूजें नरनारी

प्रेम भक्ति से जो यश गावें
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें
ध्यावे तुम्हे जो नर मन लाई
जन्ममरण ताकौ छुटि जाई

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी
योग नहीं बिन शक्ति तुम्हारी
शंकर आचारज तप कीनो
कामरु क्रोध जीत सब लीनो

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको
शक्ति रूप को मरम न पायो
शक्ति रूप को मरम न पायो

शरणागत हुई कीर्ति बखानी
जय जय जय जगदम्ब भवानी
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा

मोको मातु कष्ट अति घेरो
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो
आशा तृष्णा निपट सतावें
रिपु मुरख मोही अति डरपावे

शत्रु नाश कीजै महारानी
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी
करो कृपा हे मातु दयाला
ऋद्धि सिद्धि दै करहु निहाला

जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ
दुर्गा चालीसा जो गावै
सब सुख भोग परमपद पावै

देवीदास शरण निज जानी
करहु कृपा जगदंब भवानी
करहु कृपा जगदंब भवानी
शरणागत रक्षा करे

भक्त रहे नि:शंक
में आया तेरी शरण में
मातु लीजिये अंक

Credits:

  • Title: Durga Chalisa
  • Singer: Ritesh Mishra
  • Music Director: Subhash Jena
  • Edit & Gfx: Prem Graphics PG
  • Music Label: Music Nova

Full Audio Song Available on

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