“जगत के रंग क्या देखूं, साईं का दीदार काफी” — यह पंक्ति एक भक्ति भजन या साईं वंदना से है, और इसमें एक भक्त की गहरी भक्ति, वैराग्य (दुनिया से उदासीनता), और ईश्वरमय संतोष का भाव प्रकट होता है।
भावार्थ (भावना):
- मुझे सांसारिक मोह, भोग-विलास, या दिखावे की ज़रूरत नहीं।
- साईं बाबा की एक झलक, उनकी कृपा की एक नज़र, मेरे जीवन को पूर्ण बना देती है।
इस भजन का सार:
- सच्चे भक्त हैं,
- आध्यात्मिक शांति की तलाश में हैं,
- और जिन्होंने जीवन में अनुभव किया है कि ईश्वर का प्रेम ही सर्वोच्च है।
Jagat Ke Rang Kya Dekhoon Lyrics:
- English
- Hindi
Jagat Ke Rang Kya Dekhun
Sai Ka Deedar Kafi Hai
Kyun Bhatkun Gairo Ke Dar Pe
Sai Ka Darbar Kafi Hai
Jagat Ke Rang Kya Dekhun
Sai Ka Deedar Kafi Hai
Sai Ka Deedar Kafi Hai
Kyun Bhatkun Gairo Ke Dar Pe
Sai Ka Darbar Kafi Hai
Nahi Chahiye Ye Duniya Ke
Nirale Rang Dhang Mujhko
Nahi Chahiye Ye Duniya Ke
Nirale Rang Dhang Mujhko
Nirale Rang Dhang Mujhko
Chala Jaoon Main Shirdi
Chala Jaoon Main Shirdi
Tera Shringar Kafi Hai
Jagat Ke Rang Kya Dekhun
Sai Ka Deedar Kafi Hai
Jagat Ke Saaz Bajo Se
Hue Hain Kaan Ab Behre
Hue Hain Kaan Ab Behre
Kahan Jaake Sunu Sumiran
Madhur Sai Naam Kaafi Hai
Jagat Ke Rang Kya Dekhun
Sai Ka Deedar Kafi Hai
Jagat Ke Rishtedaron Ne
Bichaya Jaal Maya Ka
Bichaya Jaal Maya Ka
Tere Bhakton Se Ho Preeti
Tere Bhakto Se Ho Priti
Sai Parivar Kafi Hai
Jagat Ke Rang Kya Dekhun
Sai Ka Deedar Kafi Hai
Jagat Ki Joothi Ronak Se
Hain Aankhen Bhar Gayi Meri
Hain Aankhen Bhar Gayi Meri
Chale Aao Mere Sai
Chale Aao Mere Sai
Darash Ki Pyas Kafi Hai
Jagat Ke Rang Kya Dekhun
Sai Ka Deedar Kafi Hai
Kyun Bhatkun Gairo Ke Dar Pe
Sai Ka Darbar Kafi Hai
Jagat Ke Rang Kya Dekhun
Sai Ka Deedar Kafi Hai
Kyun Bhatkun Gairo Ke Dar Pe
Sai Ka Darbar Kafi Hai
जगत के रंग क्या देखूं
साईं का दीदार काफी है
क्यों भटकूं गैरों के दर पे
साईं का दरबार काफी है
जगत के रंग क्या देखूं
साईं का दीदार काफी है
साईं का दीदार काफी है
क्यों भटकूं गैरों के दर पे
साईं का दरबार काफी है
नहीं चाहिए ये दुनिया के
निराले रंग ढंग मुझको
नहीं चाहिए ये दुनिया के
निराले रंग ढंग मुझको
निराले रंग ढंग मुझको
चला जाऊं मैं शिर्डी
चला जाऊं मैं शिर्डी
तेरा श्रृंगार काफी है
जगत के रंग क्या देखूं
साईं का दीदार काफी है
जगत के साज़ बाजों से
हुए हैं कान अब बहरे
हुए हैं कान अब बहरे
कहाँ जाके सुनूं सुमिरन
मधुर साईं नाम काफी है
जगत के रंग क्या देखूं
साईं का दीदार काफी है
जगत के रिश्तेदारों ने
बिछाया जाल माया का
बिछाया जाल माया का
तेरे भक्तों से हो प्रीति
तेरे भक्तों से हो प्रीति
साईं परिवार काफी है
जगत के रंग क्या देखूं
साईं का दीदार काफी है
जगत की झूठी रौनक से
हैं आँखें भर गई मेरी
हैं आँखें भर गई मेरी
चले आओ मेरे साईं
चले आओ मेरे साईं
दरश की प्यास काफी है
जगत के रंग क्या देखूं
साईं का दीदार काफी है
क्यों भटकूं गैरों के दर पे
साईं का दरबार काफी है
जगत के रंग क्या देखूं
साईं का दीदार काफी है
क्यों भटकूं गैरों के दर पे
साईं का दरबार काफी है
Credits:
- Title: Jagat Ke Rang Kya Dekhoon
- Singer: Shailendra Bhartti
- Music Director: Navin – Manish
- Music Label: Music Nova

