
हिंदू कैलेंडर में श्रावण मास (जिसे सावन का महीना भी कहा जाता है) सबसे पवित्र महीनों में से एक है। भगवान शिव को समर्पित इस शुभ समय में व्रत, पूजा-पाठ, मंदिर दर्शन, रुद्राभिषेक और शक्तिशाली शिव मंत्रों का जाप किया जाता है। लाखों भक्त स्वास्थ्य, समृद्धि, खुशी और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए श्रावण मास का पालन करते हैं।
श्रावण मास की एक खास बात यह है कि भारत में इसकी तारीखें अलग-अलग होती हैं क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में हिंदू चंद्र कैलेंडर की अलग-अलग प्रणालियाँ मानी जाती हैं। उत्तर भारत में पूर्णिमान्त कैलेंडर का पालन किया जाता है, जबकि महाराष्ट्र और दक्षिण व पश्चिम भारत के ज़्यादातर हिस्सों में अमांत कैलेंडर का पालन किया जाता है।
इस लेख में आपको श्रावण मास 2026 की शुरुआत और समाप्ति की तारीखें, इसका आध्यात्मिक महत्व, व्रत के नियम, ज़रूरी रीति-रिवाज और इस पवित्र महीने के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी।
श्रावण मास 2026 की तिथियां
श्रावण मास दो अलग-अलग हिंदू चंद्र कैलेंडर परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है, जिसके कारण पूरे भारत में इसकी तारीखें अलग-अलग होती हैं।
उत्तर भारत (पूर्णिमान्त कैलेंडर)
आम तौर पर निम्नलिखित राज्य पूर्णिमान्त कैलेंडर का पालन करते हैं:
- उतार प्रदेश।
- राजस्थान
- दिल्ली
- हरयाणा
- पंजाब
- हिमाचल प्रदेश
- उत्तराखंड
- मध्य प्रदेश
श्रावण मास 2026 की तिथियाँ:
शुरू: 30 जुलाई 2026 (गुरुवार)
समाप्त: 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण/पश्चिम भारत (अमंता कैलेंडर)
आम तौर पर निम्नलिखित राज्य पूर्णिमान्त कैलेंडर का पालन करते हैं:
- महाराष्ट्र
- गुजरात
- कर्नाटक
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
- गोवा
- तमिलनाडु
श्रावण मास 2026 की तिथियाँ:
शुरू: 13 अगस्त 2026 (गुरुवार)
समाप्त: 11 सितंबर 2026 (शुक्रवार)
श्रावण मास का इतना महत्व क्यों है?
श्रावण मास को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों में इस समय को प्रार्थना, व्रत, ध्यान और दान-पुण्य के कार्यों के लिए विशेष रूप से शुभ बताया गया है।
माना जाता है कि श्रावण के दौरान सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा से ईश्वरीय आशीर्वाद मिलता है, बाधाएं दूर होती हैं और भक्तों को अपनी आध्यात्मिक यात्रा में आगे बढ़ने में मदद मिलती है।
श्रावण मास का रहस्य
श्रावण मास का महत्व समुद्र मंथन की प्रसिद्ध कथा से गहराई से जुड़ा है।
जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तो ‘हलाहल’ नाम का एक घातक विष निकला। इस विष से पूरी सृष्टि के नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया था।
सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने करुणावश उस विष को पी लिया। देवी पार्वती ने उनके गले को पकड़कर विष को उनके शरीर में फैलने से रोक दिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया। इसीलिए भगवान शिव को प्यार से ‘नीलकंठ’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है “नीले गले वाले”।
भगवान शिव के इस त्याग के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए भक्त पूरे श्रावण मास में उन्हें जल, दूध, बेलपत्र, शहद अर्पित करते हैं और पवित्र प्रार्थनाएं करते हैं।
श्रावण मास का आध्यात्मिक महत्व
श्रावण मास को शुद्धि और भक्ति का महीना माना जाता है।
हिंदू परंपरा के अनुसार, इस महीने में की गई पूजा को खास तौर पर फल देने वाला माना जाता है। यह भक्तों को विश्वास, अनुशासन और दया के ज़रिए भगवान के साथ अपने रिश्ते को मज़बूत करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
कई भक्त ज़्यादा समय देते हैं:
- रोज़ाना शिव की पूजा
- ध्यान
- “ॐ नमः शिवाय” का जाप
- शिव पुराण का पाठ
- रुद्राभिषेक
- दान और सेवा
- आत्म-संयम और दया का अभ्यास
श्रावण मास के दौरान महत्वपूर्ण त्यौहार
क्षेत्रीय कैलेंडर और चंद्र तिथियों के आधार पर, श्रावण मास में कई महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार आते हैं।
इनमें ये शामिल हो सकते हैं:
- श्रावण सोमवार व्रत
- नाग पंचमी
- पुत्रदा एकादशी
- रक्षाबंधन
- श्रावण पूर्णिमा
- हयग्रीव जयंती
- ऋग्वेद और यजुर्वेद उपाकर्म
- वरलक्ष्मी व्रत (मुख्यतः दक्षिण भारत में)
- कृष्ण जन्माष्टमी (कुछ क्षेत्रीय कैलेंडर में)
सावन में भगवान शिव की पूजा करने का तरीका
जलाभिषेक करें
“ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए शिवलिंग पर साफ़ पानी या गंगाजल चढ़ाएँ।
बिल्व पत्र अर्पित करें
भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली चीज़ों में बिल्व पत्र को सबसे पवित्र माना जाता है। पारंपरिक रूप से, भक्त पूजा के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ ताज़े पत्ते अर्पित करते हैं।
शिव मंत्रों का जाप करें
लोकप्रिय मंत्रों में शामिल हैं:
- ॐ नमः शिवाय
- महा मृत्युंजय मंत्र
- शिव पंचाक्षरी मंत्र
- रुद्रम (वैदिक मंत्रोच्चार से परिचित लोगों के लिए)
पवित्र ग्रंथ पढ़ें
- शिव पुराण
- शिव चालीसा
- रुद्राष्टकम
- लिंगाष्टकम्
शिव मंदिरों के दर्शन करें
मंदिरों में श्रावण मास के दौरान विशेष अभिषेक समारोह, रुद्र पाठ और भक्तिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
निष्कर्ष
श्रावण मास आस्था, आत्म-अनुशासन और आध्यात्मिक जागृति का एक पवित्र महीना है। चाहे आप व्रत रखें, शिव अभिषेक करें, “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें या बस रोज़ाना कुछ पल प्रार्थना में बिताएं, यह पवित्र महीना भगवान शिव के प्रति आपकी भक्ति को और गहरा करने का एक सार्थक अवसर देता है।
भले ही पूर्णिमान्त और अमांत कैलेंडर परंपराओं के अनुसार तिथियां अलग-अलग हों, लेकिन श्रावण मास का मूल भाव वही रहता है—भगवान शिव का आशीर्वाद पाने, आंतरिक शांति पाने और करुणा, विनम्रता व भक्ति के साथ जीवन जीने का समय।
भगवान शिव श्रावण मास 2026 के दौरान आप पर और आपके परिवार पर अपनी दिव्य कृपा बनाए रखें।
हर हर महादेव!

