“बुद्धं शरणं गच्छामि” एक अत्यंत पवित्र और मूल बौद्ध प्रार्थना (त्रिरत्न शरणगमन) का हिस्सा है, जिसे “त्रिशरण” या “त्रिसरण” कहा जाता है। यह वाक्य बुद्ध धर्म में दीक्षा (initiation) और भक्ति के मूल आधारों में से एक है।
भावार्थ / अर्थ:
| वाक्य | अर्थ |
|---|---|
| बुद्धं शरणं गच्छामि | मैं बुद्ध की शरण में जाता हूँ (जिन्होंने ज्ञान प्राप्त किया)। |
| धम्मं शरणं गच्छामि | मैं धम्म (धर्म / सत्य / बुद्ध के उपदेश) की शरण में जाता हूँ। |
| संघं शरणं गच्छामि | मैं संघ (बौद्ध साधु-संतों के समुदाय) की शरण में जाता हूँ। |
महत्व:
- बौद्ध धर्म में यह दीक्षा का पहला कदम होता है।
- यह बताता है कि अनुयायी अब अंधविश्वास या बाहरी शक्तियों पर नहीं, बल्कि ज्ञान, करुणा और सत्य पर आधारित जीवन जीएगा।
- यह आत्मनिर्भरता, करुणा, और संयम का संकल्प है।
कब बोला जाता है?
- बौद्ध पूजा या ध्यान के समय
- बौद्ध दीक्षा संस्कार में
- बुद्ध पूर्णिमा या वैशाख दिवस पर
- आत्मिक संकट के समय शांति के लिए
Buddham Saranam Gacchami Lyrics:
- English
- Hindi
Buddham Saranam Gacchami
Dhammam Sharanam Gachami
Sangham Sharanam Gachami
बुद्धं शरणं गच्छामि
धर्मं शरणं गच्छामि
संघं शरणं गच्छामि
Credits:
- Title: Buddham Saranam Gacchami
- Singer: Manoj Tembe
- Music Director: Shreerang Aras
- Lyrics: Traditional
- Music Label: Music Nova






