“कराग्रे वसते लक्ष्मी” एक संस्कृत श्लोक है जो प्रातःकाल उठते ही बोला जाता है। यह श्लोक हमारे हाथों में भगवानों की उपस्थिति का ध्यान करते हुए दिन की शुभ शुरुआत के लिए बोला जाता है।
भावार्थ / अर्थ:
- कराग्रे (हाथों के अग्रभाग यानी उंगलियों के आगे): वहाँ लक्ष्मी जी का वास है – जो धन और समृद्धि की देवी हैं।
- करमध्ये (हाथ के मध्य भाग में): वहाँ सरस्वती जी का वास है – जो ज्ञान और विद्या की देवी हैं।
- करमूले (हथेलियों के मूल भाग यानी हथेली के पास की कलाई में): वहाँ गोविंद (भगवान विष्णु) का वास है – जो पालक और रक्षक हैं।
महत्व:
- यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि हमारे कर्म (हाथों से किए गए कार्य) ही हमारे जीवन को दिशा देते हैं।
- यह सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास से दिन की शुरुआत करने का एक आध्यात्मिक तरीका है।
Karagre Vasate Lakshmi Lyrics:
- English
- Sanskrit
Karagre Vasate Lakshmi
Kar Madhye Saraswati
Kar Mule Tu Govindam
Prabhate Kar Darshanam
Samudra Vasane Devi
Parvatastana Mandale
Vishnupatni Namastubhyam
Paada Sparsham Kshamasva Me
Vasudeva Sutam Devam
Kansa Chanura Mardanam
Devaki Paramanandam
Krishnam Vande Jagadgurum
कराग्रे वसते लक्ष्मी
कर मध्ये सरस्वती
कर मूले तु गोविंदम
प्रभाते कर दर्शनम्
समुद्र वसने देवी
पर्वतस्तन मंडिते
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं
पाद स्पर्शं क्षमस्व मे
वसुदॆव सुतं दॆवं
कंस चाणूर मर्दनम्
दॆवकी परमानन्दं
कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम्
Credits:
- Title: Laxmi Maa Shlok – Karagre Vasate Lakshmi
- Singer: Brahmins
- Music Director: Subhash Jena
- Edit & Gfx: Prem Graphics PG
- Music Label: Music Nova

