नवरत्नम् एक स्तोत्र है जो भगवान श्री गणेश की स्तुति में रचित है और इसमें नौ (9) श्लोक होते हैं — इसलिए इसे “नवरत्नम्” (नव = 9, रत्नम् = रत्न/मूल्यवान श्लोक) कहा जाता है।
नवरत्नम् क्या है?
- विघ्नों का नाश होता है।
- आयु, आरोग्य, और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
- कार्यों में सफलता मिलती है।
- मन में शांति और एकाग्रता आती है।
- भक्ति और बुद्धि की वृद्धि होती है।
नवरत्नम् के लाभ (फलश्रुति):
- श्रीगणेश की कृपा प्राप्त करने हेतु — विघ्नों का नाश और कार्यों में सफलता।
- विद्या, बुद्धि और विवेक के लिए — विशेष रूप से छात्र, लेखक, कलाकार और व्यवसायी इस स्तोत्र का पाठ करते हैं।
- भय, बाधाओं और विघ्नों से रक्षा के लिए — क्योंकि गणेशजी को विघ्नहर्ता कहते हैं।
- आरंभ करने से पहले — कोई भी नया कार्य, पूजा, यज्ञ या प्रयास शुरू करने से पहले गणेश पंचरत्न का पाठ करना शुभ माना जाता है।
Navratnam Lyrics:
- English
- Sanskrit
Athah Navratnam
Chintakaapi Na Karyaa
Niveditatmabhih Kadapiti
Bhagwanpi Pushtistho
Na Karishyati Laukikim Cha Gatim
Nivedanam Tu Sasmartavyam
Sarvatha Tadrushairjanaih
Sarveshavarscha Sarvatma
Nijecchatah Karishyati
Sarvesham Prabhu Sambandho
Na Pratyekakamiti Sthitih
Atonya Viniyogepi
Chinta Ka Svasya Sopichet
Agyanadathava Gyanaat
Krutamatmanivedanam
Yaih Krushnasatkruta Pranaistasham
Ka Paridevana
Tatha Nivedane Chinta
Tyajya Shripurushottame
Viniyogepi Sa Tyaajya
Samartho Hi Harih Svatah
Loke Svasthyam Tatha Vede
Haristu Na Karishyati
Pushtimargasthito Yasmaat
Sakshino Bhavtakhila
Sevakrutirguroragna Badhanam
Vaa Harichchhya
Atah Sevaparam Chintam
Vidhaay Sthiyatam Sukham
Chittodvegam Vidhayapi
Hariryadhyatkarishyati
Tathaiv Tasya Lileti
Matva Chintaam
Drutam Tyajet
Tasmaat Sarvatmana Nityam
Shri Krushnam Sharanam Mama
Vadadbhirevam Satatam
Stheyamityeva Me Matih
अथः नवरत्नम
चिंताकापि न कार्या
निवेदितात्मभिः कदापिति
भगवानपि पुष्टिस्थो
न करिष्यति लौकिकिं च गतिम्
निवेदनम् तु सस्मर्तव्यं
सर्वथा ताद्रुषैर्जनैः
सर्वेशवर्षश्च सर्वात्मा
निजेच्छातः करिष्यति
सर्वेषां प्रभु संबंधो
न प्रत्येककमिति स्थितिः
अतोन्य विनियोगेपी
चिंता का स्वस्य सोपिचेत
अज्ञानादथवा ज्ञानात
अज्ञानादथवा ज्ञानात
यैः कृष्णसात्कृत प्राणैस्तषां
का परिदेवना
तथा निवेदने चिंता
त्याज्या श्रीपुरुषोत्तमे
विनियोगेपी सा त्याज्या
समर्थो हि हरिः स्वत:
लोके स्वास्थ्यं तथा वेदे
हरिस्तु न करिष्यति
पुष्टिमार्गस्थितो यस्मात
साक्षिणो भवताखिला
सेवाकृतिरगुरोराज्ञा बाधनं
वा हरिच्छ्या
अत: सेवापरं चिन्तम
विधाय स्थीयतां सुखम्
चित्तोद्वेगम विधायापी
हरिर्यद्यत्करिष्यति
तथैव तस्य लिलेति
मत्वा चिंताम
द्रुतं त्यजेत
तस्मात् सर्वात्मना नित्यम्
श्रीकृष्णम् शरणम् मम
वदद्भिरेवं सततम
स्थेयमित्येव मे मतिः
Credits:
- Title: Navratnam
- Singer: Dhanashri Deshpande
- Music Director: Girish Mehta
- Edit & Gfx: Mind Pro
- Music Label: Music Nova






